सामाजिक यथार्थः उभरते समाजशास्त्रीय नैरेटिव (SAMAJIK YATHARTH: UBHARTE SAMAJSHASTRIYA NARRATIVE) Social Reality: Emerging Sociological Narratives
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Book Details
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Publisher: Rawat Publications
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Author: Naresh Bhargava | Jyoti Sidana
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Language: Hindi
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Binding: Paperback
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Number of Pages: 267
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Release Date: 20-08-2024
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ISBN: 9788131614136
About the Book
समाजशास्त्र का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य विश्व को अन्याय, असमानता एवं शोषण के विरुद्ध वैचारिक चेतना के बहुआयामी परिप्रेक्ष्यों से परिचित कराना है। यह परिचय नवजागरण के मूल्यों के साथ समाजशास्त्र की निरन्तरता की एक अनिवार्यता भी है। भारतीय समाजशास्त्र के लिए यह और भी आवश्यक है क्योंकि भारतीय समाज में बिखरे हुए अनेक सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण करने के लिए नवजागरण के मूल्यों की पृष्ठभूमि में पूर्व-औपनिवेशिक, औपनिवेशिक, उत्तर-औपनिवेशिक एवं वैश्वीकरण के विभिन्न चरणों की समाज व्यवस्था के साथ गत्यात्मक सम्बद्धता की समझ आवश्यक है।
यह पुस्तक समाज विज्ञान के विद्यार्थियों एवं जन सामान्य की चेतना में ‘कैसे तर्क किये जावे’ एवं ‘वैचारिकी की बाहुल्यता एव विविधता की समझ विकास एवं लोकतन्त्र हेतु क्यों जरूरी है’? जैसे प्रश्न उत्पन्न करेगी ताकि वास्तविकताओं के कारण एवं परिणामों को जाना जा सके। भारतीय समाजशास्त्र वास्तव में भारतीय सामाजिक यथार्थ के विभिन्न स्वरूपों को समझने की आलोचनात्मक विधा है, इस दिशा में यह सम्पादित पुस्तक योगदान करेगी।
सम्पादित पुस्तक में अठारह आलेख, विभिन्न सामाजिक मुद्दों एवं भारतीय सामाजिक परिवेश की अवधारणाओं से जुड़े नौ लेख तथा साहित्य समीक्षा पर विमर्श सम्मिलित हैं। पुस्तक की विशिष्टता महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरु, राम मनोहर लोहिया, एवं प्रेमचन्द की वैचारिकी के वे पक्ष हैं जो भारतीय समाज की समझ को हमारे सामने राजनीति-संस्कृति-आर्थिकी एवं साहित्यिकी की अन्तःनिर्भरता के रूप के साथ लाते हैं।
आशा है कि यह पुस्तक समाजशास्त्र के साथ-साथ अन्य सभी समाजविज्ञानों से सम्बद्ध शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

